राकेश कुमार चन्द्रा जी

Aayurvedik Upachaar

Ayurvedic

AayurvedikUpachaar” की शुरुआत राकेश कुमार चंद्रवंशी द्वारा की गई है। हमारा उद्देश्य है लोगों तक प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान को सरल भाषा में पहुँचाना ताकि हर कोई प्राकृतिक तरीकों से स्वस्थ जीवन जी सके।


यहाँ आपको रोज़ाना आयुर्वेद से जुड़ी जानकारी, घरेलू नुस्खे, जीवनशैली से जुड़े टिप्स और मौसमी देखभाल के उपाय मिलेंगे। हमारा मानना है कि आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की एक कला है।

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दिन ऋतु और उम्र के अनुसार वात पित्त और कफ की स्थिति

🥗भाग 3🥗

🥗दिन ऋतु और उम्र के अनुसार वात पित्त और कफ की स्थिति:-

🥗दिन के अनुसार:-

🥗सुबह के समय शरीर मे वात की अधिकता होती है

🥗दोपहर के समय शरीर मे पित्त की अधिकता होती है

🥗रात्रि के समय शरीर मे कफ की अधिकता होती है

🥗ऋतु के अनुसार:-

🥗गर्मियों के मौसम में शरीर में पित्त अधिक होता है

🥗सर्दियो के मौसम में कफ की अधिकता होती है

🥗बरसात के मौसम में वात की अधिकता होती है

🥗उम्र के अनुसार:-

🥗जन्म लेने से 18 वर्ष की आयु तक शरीर मे कफ की अधिकता होती है

🥗18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक शरीर मे पित्त की अधिकता होती है

🥗और 60 वर्ष से अधिक उम्र वालो के शरीर में वात की अधिकता होती है

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।

स्रोत : -
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।
-:।आपका दिन शुभ हो।:-
-:धन्यवाद:-

भोजन के नियम

🥗भाग 2🥗

🥗भोजन के नियम🥗

🥗पानी पीने का नियम जितना आवश्यक है उतना ही भोजन के नियम भी, क्योंकि इंसान आज तक अपना भोजन नही पहचानता है और हर भोजन को पकाकर उसकी पोषकता ख़त्म करता है

🥗यदि कोई इन दोनों नियम का ठीक से पालन करे, तो किसी भी बीमारी को बिना दवा से ठीक कर सकता है

🥗शुगर, दमा, अस्थमा, हार्ट अटैक ये सभी बीमारियों का इलाज सिर्फ पानी पीने और भोजन सही ढंग से करने से स्वयम हो जाता है

🥗आप जो भोजन करते है उसको पचाने के लिए किस प्रकार के एंजाइम्स (रस) चहिये इसका निर्णय लीवर करता है

🥗जब भूख लगे तब खाइये, बिना भूख के कभी न खायेँ फिर एकं दिन में 2 बार भूख लगे या 2 दिन में 1 बार

🥗पांच अंगो ( दो हाथ , 2 पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे

🥗सुबह के समय नास्ता करने के पद्धति समाप्त कीजिये, यह अंग्रेजो के मौसम के अनुसार सही है, भारतीय प्रकृति के अनुसार गलत है,

🥗सुबह अधिक, दोपहर में सुबह का आधा और रात्रि में दोपहर के आधे हिस्से के बराबर ही खाए, या न खायेँ

🥗सुबह फलो का सेवन करिये, यदि नहीं कर सकते तो सुबह भोजन करने का सही समय सुबह 7 बजे से 9:30 तक है, इस समय पेट भर खूब खाइए

🥗दोपहर के भोजन का समय 12 से 1 के बीच है, इस समय सुबह का आधा ही खाये 

🥗शाम के समय खाने का समय केवल सूर्य छिपने से पहले का है, लगभग 5 से 7 बजे के पास तक, इस समय सुबह के जितना ही खा सकते है, लेकिन सूर्य छिपने के 50 मिनट पहले तक, अन्यथा दोपहर का भी आधा ही खाये

🥗अपना सबसे पसंदीदा भोजन सुबह के समय खाएं, और जितना चाहे उतना खाएं

🥗गर्मी में दोपहर में छाछ या लस्सी जरूर ले यदि शुद्ध देशी गाय के दूध से बनी है तो

🥗भोजन हमेशा जमीन पर बैठकर ही खाये, ना कुर्सी पर ना ही खड़े होकर

🥗कभी भी खड़े होकर भोजन ना खाएं ,भोजन सदैव जमीन पर बैठकर सुखासन में ही करें

🥗शादी समारोह पार्टी आदि में भी भोजन जमीन पर बैठकर ही करें, इंसमे कोई शर्म नही, स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है

🥗कुर्सी या मेज पर बैठकर भी भोजन करना गलत है, यह अंग्रेजो की मजबूरी है, आपकी नहीं

🥗भोजन करने के उपरांत 10 मिनट वज्रासन की स्थिति में बैठे

🥗पुरुषों के लिए उकड़ू अवस्था में बैठकर भी भोजन किया जा सकता है जिनका पेट अधिक बाहर है, यह स्थिति भी सर्वोत्तम है

🥗दोपहर के भोजन के बाद किसी भी प्रकार का कार्य ना करे, 30-40 मिनट आराम करें, क्योंकि दोपहर के भोजन के बाद BP बढ़ता है

🥗शाम के भोजन के बाद 45 मिनट अवश्य टहलें,क्योंकि रात के भोजन के बाद BP कम होता है

🥗भोजन पकने के बाद 60 मिनट के अंदर उसे ग्रहण करें तभी सभी विटामिन्स और प्रोटीन आपको मिलेंगे, उससे अधिक देर तक रखने से सभी तत्व कम होते जाते है

🥗फ्रिज में कभी कोई भोजन दूध आदि न रखे, यदि मजबूरी में रखना पड़े तो उसे दोबारा कभी गर्म न करे, उसका सेवन करने से 2 घण्टे पहले उसे फ्रिज से निकाल कर बाहर रख दे

🥗रात्रि में कम तेलीय हल्का एव सुपाच्य भोजन ही करे, राजमा,छोले,अंडा, मांस और कोई भी दाल रात में न खायेँ, और 7 दिन में 1 बार ही इन सभी मे से कोई 1 चीज खायेँ, जैसे अगर आज दाल खाई तो 7 दिन बाद ही नम्बर आएगा या तो उस दिन दाल बनाये या फिर छोले या अन्

🥗गीले पैरों भोजन खाने से आयु में वृद्धि होती है

🥗पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए

🥗दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है

🥗पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है

🥗सोने वाले बिस्तर पर, हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो में भोजन नहीं करना चाहिए 

🥗मल-मूत्र का वेग होने पर,कलह के माहौल में,अधिक शोर में, जल्दबाजी में ,पीपल,वट वृक्ष के नीचे,भोजन नहीं करना चाहिए

🥗भोजन के ,चाय के, काढ़े के, या किसी भी अग्निवर्धक पदार्थ के सेवन करने के बाद कभी भी तुरंत स्न्नान न करें, यदि ऐसा किया तो इतने रोग होंगे कि आप सम्भाल नही पायेगे

🥗आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए 

🥗खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए 

🥗भोजन के समय शांत रहे, क्योंकि शरीर की अपनी क्रियाएं है

🥗भोजन को जितना चबाकर खायेगे उतना अच्छा क्योंकि भोजन को पचाने में 80% कार्य दांतो का और 20% पेट का है

🥗सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए 


🥗सबसे पहले रस दार भोजन, बीच में गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे

🥗थोडा खाने वाले को –आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है 

🥗मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है। 

स्रोत : - 

🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -

🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा

ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।

-:।आपका दिन शुभ हो।:-

-:धन्यवाद:-

पानी पीने के नियम

🥗भाग 1🥗

🥦🥗पानी पीने के नियम🥗🥦

🥗पानी पीने के 100 नियम है, कुछ बता रहा हूं।

🥗शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस है तो आपके शरीर के लिए इतना ही तापमान का पानी उचित है।

🥗कभी भी ठंडा पानी ,फ्रिज का पानी, बर्फ का पानी ना पिये,ताजा पानी ही पिये, मिट्टी के घड़े का पानी पी सकते है।

🥗भोजन करने के पश्चात 60-90 मिनट तक पानी का सेवन ना करें, यदि आप किसान या मजदूर आदि है तो 60 मिनट अन्यथा 90 मिनट,।

🥗सुबह उठकर उकड़ू बैठकर सवा लीटर पानी पिये।

🥗सुबह उठकर सबसे पहले 3-4 गिलास पानी ही पिये, सम्भव हो तो हल्का गुनगुना पानी पिये ।

🥗रात सोने से पहले 1 गिलास गुनगुना पानी पियें, हार्ट अटैक से बचे रहेंगे।

🥗प्लास्टिक की बोतल, लकड़ी की बोतल आदि का पानी न पिए।

🥗जब भी पानी पिये उसे घूंट-घूंट करके ही पिये, एक गिलास पानी को कम से कम 8-10 बार मे ही पिये, एक घूँट मुह में पानी भरिये थोड़ी देर चलाइये फिर पिये ,दिन भर में अगर 10 गिलास पानी पियेंगे तो 100 बार ये मुह की लार अंदर जाएगी जो अमृत है, इसी प्रकार ही पीना है।।।।

🥗प्यास लगने पर पानी न पिएं तो 13 रोग आते है, और अगर बिना प्यास के पानी पियें तो 27 रोग आते हैं।

🥗पानी उबालने पर यदि 3/4 भाग शेष बचे तो यह वातनाशक है, यदि 1/2 भाग शेष बचे तो पित्तनाशक है ,यदि 1/4 शेष बचे तो कफनाशक है।

🥗सबसे शुद्ध पानी बारिश का दूसरा पानी है।

🥗तालाबो,कुएं, पोखरों का पानी नदी के पानी से अधिक उत्तम है।

🥗पानी हमेशा बैठकर सुखासन में पऔ

🥗 आपका जितना वजन है उसमें 10 का भाग करके दो घटा दीजिए जितना लीटर बचा उतना ही आपको पीना है।

जैसे मेरा वजन 80 किलो है तो उसका 10 में भाग दिया हुआ 8 उसमें से दो घटा दीजिए हुआ 6 मुझे 6 लीटर जल पीना है।

🥗गर्मियों में मिट्टी के बर्तन का पानी सर्वोत्तम है।

🥗सर्दियो में सोने का पानी उत्तम है।

🥗बरसात में ताम्बे का पानी उत्तम है।

🥗ताम्बे के पानी अगर हमेशा पीना है तो 3 महीने लगातार पिये, फिर 1 महीने बन्द करके, फिर से पिये।

🥗गिलास की अपेक्षा लोटे में पानी पीना सर्वोत्तम है।

🥗RO का पानी पीना बन्द करें, इंसमे कोई पोषक तत्व नही।

🥗पानी को सबसे अच्छा फिल्टर चूना करता है।

🥗पानी को उबाल कर पिया जा सकता है, जिन्हें समस्या है।

🥗यह सभी नियम आपको किसी भी बीमारी से स्वयम बाहर निकाल लेगे और बीमार पड़ने की संभावना भी बहुत कम रहेगी।

🥗यदि कोई भी इन नियम का पालन करता है तो कम से कम 80 तरह के रोगों से वह बचा रहेगा।।।

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है।

स्रोत : -
🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -
🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा
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दांत साफ करने के उपाय

🥗भाग 4🥗

🥗दांत साफ करने के उपाय🥗

🥗हमारी परम्पराएँ और घरेलु ज्ञान-विज्ञान इतना ज़बरदस्त है कि अगर हम माने तो बिना दवा के भी स्वस्थ रह सकते हैं, ऐसी ही एक विधि से है जिसका नाम है कुल्ला करना, यह एक ऐसी विधि है जिससे आप बिना दवा के जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, गले के रोग, मुंह के छाले, शरीर को डी-टोक्सिफाय करने, गर्दन के सर्वाइकल जैसे रोगों से मुक्ति पा सकते हैं।

🥗सुबह उठते ही कभी भी मंजन ना करे।

🥗सुबह उठते ही सर्वप्रथम पानी पिये

🥗सुबह के समय मुँह मे जो लार बनती है, उसका ph मान 8.4 होता है, वह क्षारीय है और शरीर के लिए अमृत भी।

🥗कभी भी ब्रश का प्रयोग ना करें, इससे मसूड़े कमजोर होते है।

🥗ब्रश के बालों के बीच हमेशा हानिकारक बेक्टीरिया बने रहते है।

🥗दांत कभी भी पूर्णतय सफेद नही होते, इनका हल्का पीलापन होना स्वाभाविक है।

🥗अगर ब्रश ही प्रयोग करना है तो प्रतिदिन गर्म पानी से धोकर ही प्रयोग करें।

🥗रात्रि के सोने से पहले दांत साफ करना आवश्यक है, सुबह इतना आवश्यक नही।

🥗प्रतिदिन दांत ब्रश से साफ ना करें बेहतर है ब्रश का प्रयोग ही बन्द कर दे।

🥗पेस्ट में dicalcium phosphate है जो जानवरो की हड्डियों से बनता है।

🥗हड्डियों के साथ ही पेस्ट में fluoride मिलाते है जो शरीर में फ्लोरोसिस नाम की बीमारी करता है और भारत के पानी में पहले से ही ज्यादा फ्लोराइड है।

🥗सभी पेस्ट में Sodium Lauryl Sulphate भी है जो झाग पैदा करता है,जो जहर है ,कैसर करता है।

🥗विदेशों में पेस्ट के ऊपर चेतावनी होती है, "बच्चे इसका सेवन ना करे और यदि वो खा ले तो तुंरन्त डॉक्टर के पास जाए।

🥗पेस्ट के स्थान पर दंत मंजन का प्रयोग कर सकते है।

🥗सर्वोत्तम दातुन नीम है, कुल 12 प्रकार के दातुन है, जैसे नीम, बबुल, आम, करंज, अमरूद, शीशम, अर्जुन, जामुन, मदार, आदि।

🥗सभी दातुनो का करने का समय अलग अलग माह के अनुसार है।

🥗नीम का दातुन पूरे वर्ष किया जा सकता है।

🥗विशेष- नीम का दातुन लगातार 3 माह करें फिर 15-20 दिन के लिये छोड़ दे, उसके बाद 3 माह फिर कर सकते है, छोड़े हुए उन 20 दिनों में आप दंत मंजन इस्तेमाल कर सकते है

🥗पानी का कुल्ला-

🥗मुंह में पानी का कुल्ला तीन मिनट तक भर कर रखें।

इससे गले के रोग, जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, गर्दन का दर्द जैसे कड़कड़ाहट से छुटकारा मिलेगा।

🥗नित्य मुंह धोते समय, दिन में भी, मुंह में पानी का कुल्ला भर कर रखें।इससे मुंह भी साफ़ हो जाता है।

🥗मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोएं।

ऐसा दिन में तीन बार करें।

🥗जब भी पानी के पास जाएँ मुंह में पानी का कुल्ला भर लें और नेत्रों पर पानी के छींटे मारें, धोएं।

🥗मुंह का पानी एक मिनट बाद निकाल कर पुनः कुल्ला भर लें ,मुंह का पानी गर्म ना हो इसीलिए बार बार कुल्ला नया भरते रहें।

🥗भोजन करने के बाद गीले हाथ तौलिये से नहीं पोंछे।

आपस में दोनों हाथों को रगड़ कर चेहरा व कानों तक मलें, इससे आरोग्य शक्ति बढती है।नेत्र ज्योति ठीक रहती है।

🥗गले के रोग, सर्दी जुकाम या श्वांस रोग होने पर थोडा गुनगुना पानी ले कर इसमें सेंध नमक मिला कर कुल्ला करना चाहिए, इस से गले, कफ, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में बहुत फायदा होता है।

🥗तेल का कुल्ला-

🥗सुबह बासी मुंह में सरसों या तिल का तेल भर कर पूरे 10 मिनट तक उसको चबाते रहें, ध्यान रहे ये निगलना नहीं है, ऐसा करने से मुंह और दांतों के रोग तो ठीक होंगे ही, साथ में पूरी बॉडी डी-टोक्सिफाय होगी।

🥗रोगों से मुक्त होने की इस विधि को तेल चूषण विधि कहा जाता है।

🥗आयुर्वेद में इसको गण्डूषकर्म कहा जाता है और पश्चिमी जगत में इसको आयल पुल्लिंग कहते है।

🥗दूध का कुल्ला-

🥗अगर मुंह में या गले में छाले हो जाएँ और किसी भी दवा से ठीक ना हो रहें हो तो सुबह कच्चा दूध (अर्थात बिना उबला हुआ ताज़ा दूध) मुंह में कुछ देर तक रखें और ध्यान रहे कि इस दूध को बाहर फेंकना नहीं है।

इसको मुंह में जितना देर हो सके 10 से 15 मिनट तक रखें, कुछ देर बाद बूँद बूँद कर के ये गले से नीचे उतरने लगेगा।

🥗दाँत साफ करने के घरेलू और बेहतरीन उपाय:-

🥗आधा चमच्च हल्दी, चुटकी भर सेंधा नमक और 5-7 बूंदे सरसो की तेल को मिलाकर दांत साफ करे

🥗त्रिफला बनाकर उसमें चुटकी भर सेंधा नमक मिलाकर दांत साफ करे

🥗गाय के गोबर के कंडे बनाकर सुखाकर जला ले,चुटकी भर पिसी फिटकरी और सेंधा नमक मिलाकर दांत साफ करें

🥗पेस्ट पर हरा निशान का अर्थ है प्राकृतिक चीजों से बना हुआ।

🥗पेस्ट पर काला निशान का अर्थ है पूर्णतय केमिकल है

🥗पेस्ट पर लाल निशान का अर्थ है केमिकल और प्राकृतिक वस्तु का इस्तेमाल।

🥗पेस्ट पर नीला निशान का अर्थ है, प्राकृतिक और औषधीय चीजों से बना हुआ, किन्तु सोडियम लारेल सल्फेट इंसमे भी है।

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है। 

स्रोत : -

🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -

🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा

ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।

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बर्तन का महत्व

🥗भाग 5🥗

🥗🥗बर्तन का महत्व🥗🥗

🥗एल्युमिनियम और स्टील के बर्तन दोनो ही जहर है।।।

🥗ऐसा भोजन कभी ना खाएं जो सूर्य के प्रकाश और वायु के सम्पर्क में ना बनाया गया हो , जैसे कुकर,माइक्रोवेव ओवन,फ्रिज आदि में पका हुआ रखा हुआ चावल , दाल, आलू आदि ।।।

🥗एल्युमिनियम के बर्तन जेल में बन्द भारत के क्रांतिकारी के लिए अंग्रेजो ने चलवाये जिससे ये कमजोर हो एव बीमार रहे और स्वत् ही मृत्यु को प्राप्त हो

🥗एल्युमिनयम बहुत भारी तत्व है, हमारा शरीर यह पदार्थ शरीर से बाहर नही निकाल पाता है, और विष के रूप में शरीर मे एकत्रित होता रहता है

🥗एल्युमिनियम के बर्तन में पका हुआ एव रखा हुआ भोजन जहर के समान ही है, कुल 48 बीमारियों का कारण है

🥗एल्युमिनियम के बर्तनों में पके भोजन से अस्थमा ,दमा, शुगर,थाइराइड, लकवा, ब्रेनहेमरेज और टीबी 100% हो जाएगा मात्र 10 वर्ष में

🥗सोलर कुकर में भी आजकल एल्युमिनियम का प्रयोग कर रहे है, वह भी बहुत हानिकारक है

🥗कुछ बदलाव घर के बर्तनों में कीजिये, सबसे अच्छे तो मिट्टी के है, सभी बर्तन मिट्टी के हो तो सबसे अच्छा।।

🥗कम से कम लोहे की एक कढ़ाई अवश्य हो,जिसमें सब्जी पकाई जाए

🥗दूध,दही आदि रखने के लिए मिट्टी के बर्तन हो

🥗दूध गर्म करने के लिए भी मिट्टी के बर्तन ही हो

🥗दाले आदि पकाने के बाद मिट्टी के बर्तन में ही रखें तो सबसे बेहतर

🥗सब्जी पकाने और पकाकर रखने के लिये कांसे के बर्तन भी अच्छे है एक दो बर्तन पतीला आदि लेकर रखें

🥗कांसे में खट्टी चीजे या खट्टी सब्जियां न पकाये न और ना ही पकाकर रखे

🥗घर मे सभी सदस्यो के अनुसार ताँबे का लोटा रखें,जिससे समय समय पर ताँबे का पानी पीते रहे

🥗ताँबे के लोटे में दूध या इससे बना कुछ भी न पिएं

🥗सब्जी बनाने और बनाकर रखने के लिए पतीला, भगोना आदि पीतल के भी एक दो बर्तन लाये

🥗खांना खाने के लिए भी पीतल के कटोरी, चम्मच, थाली आदि लाये..... यदि घर मे 6 सदस्य है तो कम से कम....4 थाली कटोरी चम्मच गिलास आदि तो पीतल का ला ही सकते है

🥗सोना-

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने, रखने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

इसका इस्तेमाल सर्दी के मौसम में करे

🥗चाँदी-

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

इसका इस्तेमाल गर्मी के मौसम में करे

🥗तांबा-

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है.

🥗तांबे के बर्तन में दूध,दही, छाछ नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

इसका इस्तेमाल बारिश के मौसम में करे

🥗लोहा-

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है।

✔लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

🥗लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। 

इसका इस्तेमाल किसी भी मौसम में कर सकते ह

🥗पीतल-

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

इसका इस्तेमाल किसी भी मौसम में कर सकते है

🥗स्टील-

ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा भी नहीं पहुँचता इसका इस्तेमाल न करें तो बेहतर अगर करे तो भी कोई फायदा नही।

🥗एलुमिनियम-

यह जहर है। एल्युमिनियम बॉक्साइट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुकसान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम में खांना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

इसका इस्तेमाल कभी न करें

🥗काँसा-

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

🥗लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है।

इसका इस्तेमाल किसी भी मौसम में कर सकते है, यह मिट्टी के बाद सर्वश्रेष्ट धातु है

🥗🥗🥗मिट्टी-

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

इसका उपयोग जीवन भर किसी भी मौसम में कर सकते है, यह एकलौता सर्वोत्तम धातु है

🥗मिट्टी के बर्तन में पके भोजन के लाभ:-

🥗गठिया ठीक

🥗शुगर ठीक

🥗दमा ठीक

🥗अर्थराइटिस ठीक

🥗आंखे कभी खराब नहीं होगी

🥗सरदर्द कभी नही

🥗फेफड़े, लीवर, किडनी कभी खराब नहीं

🥗कोई रोग कभी नही आएगा, यदि रोग है तो खुद ठीक हो जाएगा बिना किसी दवा के।

🥗कैंसर कभी नही हो सकता

🥗शरीर को सभी 18 पोषक तत्व मिलते है

🥗मिट्टी की हांडी की दाल,दूध, पानी, सब्जी, चावल, रोटी आदि के लिए बर्तन अवश्य लाये, यदि सभी बर्तन नही ला सकते तो।।।

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है। 

स्रोत : -

🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -

🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा

ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।

-:।आपका दिन शुभ हो।:-

-:धन्यवाद:-

बाजार में बिकने वाले बच्चो के हेल्थ टोनिक्स का सच

🥗भाग 6🥗

🥗🥗🥗बाजार में बिकने वाले बच्चो के हेल्थ टोनिक्स का सच:-

🥗HEALTH TONICS ( BOOST, HORLICKS, BORNVITA, च्वनप्राश इत्यादि

🥗इनमे कोई पोषक तत्व नही है

🥗कुछ हेल्थ टोनिक्स में गेंहू का आटा है,और उनमे गेंहू की गुणवत्ता निम्न स्तर की है

🥗कुछ हेल्थ टोनिक्स में जौ का आटा है जो कि बहुत कम है, क्योंकि जौ आजकल किसान खेतो में कम उगाता है।

🥗कुछ हेल्थ टोनिक्स में चने का आटा है।

🥗सभी हेल्थ टोनिक्स में मूंगफली का तेल निकालने के बाद जो ख़ली बचती है, जिसे जानवर खाते है, वो है।

🥗सभी हेल्थ टोनिक्स में सोयाबीन की ख़ली है, जो बहुत खतरनाक है, सोयाबीन को पचाने वाले एंजाइम मानव शरीर मे नही है, वह सिर्फ सुअर के अंदर है।

🥗हेल्थ टोनिक्स में चीनी है जो बहुत खतरनाक है, बच्चो में कफ की अधिकता पहले ही बहुत होती है, और यह उनके लिए और भी खतरनाक है।

🥗कुछ हेल्थ टोनिक्स में चॉकलेट के तत्व है जिनमे सुअर का मांस मिला होता है।

🥗च्वनप्राश में चीनी, सैक्रीन का जहर है जो शुगर और कैंसर करने के लिए पर्याप्त है।

🥗इनसे बेहतर गुड़ और चना मिलाकर बच्चो को खिलाएं।

🥗बच्चो को चने का आटा खिलाये।

🥗बच्चो को चने के सत्तू खिलाये।

🥗थोड़ा तिल, थोड़ा मूंगफली थोड़ा गुड़, मिलाकर दे, बहुत ताकतवर है।

🥗चने का आटा, थोड़ा जौ का आटा, थोड़ा तिल, थोड़ा मूंगफली थोड़ा गुड़, थोड़ा गेंहू का आटा के लड्डू भी बनाकर दूध से दे, किसी भी हेल्थ टॉनिक से 100 गुणा ताकतवर है।

नोट:- आयुर्वेदिक औषधि लेने से पहले वैधानिक चेतावनी:-

स्वदेशी और अच्छी गुणवत्ता वाली औषधियों का प्रयोग करें। बिना वैद्य की सलाह के कोई भी औषधि न लें, और यदि कोई साइड इफेक्ट या अनुपात में समस्या हो, तो तुरंत अपने पास के वैद्य से संपर्क करें। स्वास्थ्य और उनकी सलाह का पालन करें। आयुर्वेदिक चिकित्सा का पालन करते समय आश्वासन बनाए रखें कि आप विशेष रूप से आपके लिए निर्दिष्ट औषधियों और खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जैसे कि आपके वैद्य ने सुझाया है। 

स्रोत : -

🥗 ब्रह्मचर्य औषधि समाधान 🥗

जानकारी को संकलित किया गया : -

🌷राकेश कुमार चंद्रवंशी (चन्द्रा जी)🌷 द्वारा

ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना करते हैं।

-:।आपका दिन शुभ हो।:-

-:धन्यवाद:-

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